बच्चों का फोन से अधिक लगाव- “बना सकता है बीमार”

बदलते जमाने के साथ बच्चे भी बचपन से टेक्निकल होते जा रहे हैं और हो भी क्यों ना “आप लोग बच्चों को आदतें ही ऐसी डलवा रहे ह़ो “!!!! छोटा बच्चा जब रोता है तो उसे गोदी में उठाकर चुप कराने की वजाय हाथ में मोबाइल पकड़ा कर चले जाते हो या बच्चे के साथ समय गुजारने की वजाय आप अपने फोन के साथ अधिक व्यस्त हो जाते हो जिससे बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्या पैदा हो रही हैं। आजकल बच्चों में नयी-नयी समस्याएं देखने को मिल रही हैं जैसे- चिड़चिड़ापन, अधिक गुस्सा होना, जिद करना, किसी की बात ना मानना, लोगों के प्रति अच्छा व्यवहार न करना, पढ़ाई में मन ना लगना, खाने में अरुचि ऐसी बहुत सी आदतें हैं जो बच्चों में देखने को मिल रही है परंतु आप इन बातों से अनभिज्ञ है कि फोन का ज्यादा इस्तेमाल भी इन सभी आदतों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

 

 

एक रिसर्च में सामने आया है कि फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगे बच्चे के दिमाग और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं तथा दिमाग का विकास होने से रोकती हैं जिससे बच्चे का मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। मोबाइल रेडिएशन कितना खतरनाक होता है आप सोच भी नहीं सकते उससे सिर में झनझनाहट, लगातार थकान,  चक्कर आना, डिप्रेशन, नींद ना आना ,आंखों में ड्राईनेस, याददाश्त में कमी होना, पाचन में गड़बड़ी आदि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती हैं।

बच्चों के डिजिटल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से उनमें अनिंद्रा जैसी शिकायतें आने लगती है जब बच्चा कम उम्र से ही मोबाइल के साथ ज्यादा वक़्त गुजरेगा तो बच्चे का विकास  अविरुद्ध हो ही जाएगा और ना ही बच्चा व्यवहारिक बन पाएगा बच्चे का क्रिएटिव माइंड सीमित होने लगता है वह लोगों से बात करने की वजाय खुद अकेले रहना ज्यादा पशन्द करता है या फोन के साथ वक्त गुजरना पसंद करता है।

 

 

जितना हो सके बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखें और बच्चों को चुप कराने के लिए या व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में फोन ना दें, बच्चों के साथ समय बिताएं, बाहर लेकर जाएं, साथ के बच्चों के साथ खेलने दें। छोटे बच्चों के मानसिक विकास पर कोई असर ना पड़े उसके लिए बच्चों को खुद से करना सीखने दें। कोई गलती करने पर डांटने की वजाय उसे प्यार से समझायें और कुछ अच्छा करने पर उसे प्रोत्साहित करें।

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