आखिर क्या चाहते हैं “नक्सली”

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जिस तरह से हाल ही के कुछ दिनों में नक्सली हमलों में तेजी आई है बहुत ही गंभीर मुद्दा है यह हमारे देश के लिए। बस्तर जिले में सीआरपीएफ की बहुत सी  बटालियन तैनात है जो कि घने जंगलों में बसे लोगों को आधुनिकता से जोड़ने का प्रयास कर रही है जहां तक कि सड़क निर्माण व  बिजली पहुंचाने का कार्य सुरक्षाबलों के हाथ में है और इस आधुनिकता से जोड़ने का खामियाजा (स्थानीय लोगों द्वारा ही नक्सलियों से मिलकर) इन जवानों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। 2 महीने में नक्सलियों द्वारा सीआरपीएफ के जवानों पर किया गया यह दूसरा हमला है पहला हमला 11 मार्च 2017 को सुकमा में हुआ जिसमें 12 सीआरपीएफ के जवानों की जान चली गई यह हमला 219 बटालियन सीआरपीएफ के जवानों पर किया गया , दूसरा हमला 24 अप्रैल 2017 को किया गया इस हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए यह हमला 74 बटालियन सीआरपीएफ के जवानों पर किया गया । यह हमला सड़क निर्माण कार्य के दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर किया।

लगातार होते नक्सली हमले हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर जाते हैं आखिर कब तक बेकसूर जवान अपनी जान को यूंही गवांते रहेंगे बेहद दुख होता है शहीदों की पत्नियों की  उजड़ी हुई मांग देखकर, बच्चों के सिर से बाप का साया एक पल में ही उठ जाना, मां-बाप का अपने बेटे का पथराई हुई आंखों से इंतजार करना और हमारे देश की सरकार का कुछ ना कर पाना आखिर कब तक चलता रहेगा ये। आखिर क्या चाहते हैं नक्सली…. क्यों नक्सली विकास नहीं होने देना चाहते क्यों वह आधुनिक जीवन में आगे नहीं बढ़ना चाहते सड़क निर्माण कार्य हो या अंदर जंगलों तक बिजली का पहुंचाना, क्यों नक्सली सड़कों को उखाड़ फैंकते हैं और क्यों अंधेरे में रहना पसंद करते हैं।आखिर किसके खिलाफ लड़ाई है नक्सलियों की अपने स्वयं के देशवासियों से या अपने देश से।

एक और सवाल मेरा अपनी सरकार से है क्या नक्सलियों से निपटने की नीति जो केंद्र और राज्य सरकार अपना रही है वह काफी है….? आखिर कहां चूक हो जाती है हमारी सुरक्षा व्यवस्था में कि नक्सली इतनी सुनियोजित ढंग से इतनी बड़ी संख्या में हमारे जवानों पर हमला कर देते हैं और जवानों को पता तक नहीं चल पाता।

नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय लोगों को अपने साथ लेने की जरूरत है उन लोगों में जागरुकता फैलाने की जरूरत है जिससे वह भी नक्सलवाद से निपटने में जवानों का साथ दे सके । नक्सलवाद से निपटने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस व सीआरपीएफ दोनों की है दोनों को ही साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके साथ-साथ केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा विकास कार्य के लिए भेजी गई राशि को सुनियोजित ढंग से विकास कार्य में लगाए जाने की आवश्यकता है जिससे अफसरों का भ्रष्टाचार कम हो सके।

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